0:00
नमस्कार दोस्तों, टोनी रॉबिंस की बुक
0:04
अवेकन द जॉइंट विद इन के चैप्टर टू का
0:06
समरी आप सुन रहे हो। इस चैप्टर का नाम है
0:11
द पावर टू क्रिएट एंड द पावर टू
0:13
डिस्ट्रॉय। और आज हम गहराई से समझेंगे कि
0:17
कैसे आपके बिलीव्स ही आपकी जिंदगी बनाते
0:20
हैं और बिगाड़ भी देते हैं। तो टॉबिन टॉ
0:24
रबिंस का कहना है इट्स नॉट द इवेंट्स ऑफ
0:27
हर लाइफ दैट शेप अस बट अ बिलीव्स एस टू
0:30
व्हाट दोज़ इवेंट्स मीन।
0:33
मतलब हमारी लाइफ की जो कहानी है वह
0:37
इवेंट्स से नहीं बनती बल्कि उन इवेंट्स के
0:40
बारे में हम जो बिलीफ बना लेते हैं वही
0:44
हमारा फ्यूचर डिसाइड करता है।
0:47
अब सोचिए बिलीफ होता क्या है?
0:50
बिलीफ एक्ट्स लाइक अ फिल्टर। यह एक फिल्टर
0:59
जिसके थ्रू हम दुनिया को देखते हैं,
1:06
अगर बिलीफ एंपावरिंग है। एंपावरिंग का
1:10
मतलब आपको सशक्त बनाता है।
1:14
तो वो हमें हिम्मत देता है। एनर्जी देता
1:17
है और नए-नए रास्ते दिखाता रहता है।
1:22
लेकिन अगर बिलीफ लिमिटिंग है। लिमिटिंग
1:30
नेगेटिविटी की तरफ लेके जाता है या ये
1:32
बताता है कि यार ये चीज में बहुत ज्यादा
1:35
कुछ दम नहीं है। तो वो हमें बांध देता है।
1:40
हमें रोक देता है और पोटेंशियल को काफी
1:46
अब इंडिया की बात करते हैं। इंडिया में
1:49
बहुत सारे टैलेंटेड लोग एक लिमिटिंग बिलीफ
1:54
के चक्कर में बाकी दुनिया से पीछे रह जाते
2:00
एक स्टूडेंट है और उसका ये बिलीफ है कि
2:04
इंग्लिश नहीं आती तो मैं सक्सेसफुल नहीं
2:10
अब ये उसने एक लिमिटिंग बिलीफ बना लिया।
2:12
बट क्या ये रियलिटी है? हमारी कंट्री में
2:16
बहुत सारे प्राइम मिनिस्टरर्स,
2:17
प्रेसिडेंट्स हुए हैं। एंड दे वर ऑन द टॉप
2:20
पोस्ट। बट क्या उनको अंग्रेजी आती थी?
2:22
नहीं आती थी। कपिल देव ने 1983 का वर्ल्ड
2:25
कप जब जीता उनको भी बड़ी टूटी-फूटी सी
2:27
इंग्लिश आती थी। पर क्या उन्होंने
2:29
कैप्टेंसी लेने से मना कर दिया? बड़े-बड़े
2:32
बिजनेसमैन और लीडर्स हैं वो फ्लूएंट
2:34
इंग्लिश नहीं बोल पाते।
2:37
फिर भी दुनिया भर में उनका नाम है। सो
2:41
लिमिटिंग बिलीफ बस एक इनविज़िबल चेन है जो
2:49
अब आइए एक एंपावरिंग बिलीफ का एग्जांपल
2:52
लेते हैं। नीरज चोपड़ा जिन्होंने ओलंपिक
2:55
में गोल जीता था। द जैवलिन थ्रोअर फ्रॉम
3:00
अब वो एक छोटे से गांव का लड़का है
3:07
मतलब जहां वो उन्होंने उनका जन्म हुआ तो
3:10
वहां जैवलिन थ्रो का कोई बढ़िया
3:13
इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। एंड उसके अलावा
3:17
लोग उनको कहा करते थे कि इंडिया एक कंट्री
3:21
है जो क्रिकेट लविंग नेशन है और एथलेटिक्स
3:23
में ओलंपिक गोल्ड नहीं ला सकता।
3:29
नीरज चोपड़ा के पास पूरी ओपोरर्चुनिटी थी
3:31
कि वो ये एक लिमिटिंग बिलीव बना ले और
3:33
छोड़ दे और कुछ और अपनी जिंदगी में करें।
3:36
लेकिन उन्होंने इसको एमावरिंग बिलीफ
3:39
बनाया। मैं कर सकता हूं और एक दिन मैं
3:44
और उसी एंपावरिंग बिलीफ ने उन्हें टोक्यो
3:49
ओलंपिक में पहला गोल्ड मेडल दिलाया।
3:52
दोस्तों यही है। यही होती है एमावरिंग
3:57
अब एक और एग्जांपल लेते हैं। रितेश
4:03
अब उनके पास ना एमबीए की डिग्री थी, ना
4:05
पैसा और ना ही बिजनेस बैकग्राउंड। लेकिन
4:08
उनका बिलीव था मैं एक ऐसा मॉडल बना सकता
4:11
हूं जो हर यूथ ट्रैवलर की प्रॉब्लम सॉल्व
4:15
करें। अब o की बात करें तो आज दुनिया के
4:19
80 प्लस कंट्रीज में ooo चेन इज वर्किंग।
4:23
सोचो अगर उन्होंने यह बिलीफ पकड़ लिया
4:28
होता कि मैं सिर्फ एक छोटे शहर का लड़का
4:31
हूं। मैं क्या कर सकता हूं? तो ओयo कभी
4:38
टोनी रॉबिंस कहते हैं कि हमारी आइडेंटिटी
4:42
भी हमारे बिलीव्स से बनती है।
4:47
मतलब जो हम सोच के बिलीव्स बनाते हैं
4:50
उन्हीं बिलीव्स से हमारी आइडेंटिटी बनती
4:53
है। सो अगर आप बिलीव करते हो कि मैं तो
4:59
मैं कुछ बड़ा कर नहीं पाऊंगा तो आप कभी
5:03
ट्राई ही नहीं करोगे। अगर ट्राई करने की
5:06
कोशिश भी करोगे अंदर से आवाज ही नहीं
5:08
आएगी। अंदर से जोर ही नहीं लगेगा। लेकिन
5:11
अगर आप बिलीव करते हो कि मैं सीख कर मेहनत
5:16
करके अपनी कहानी लिख सकता हूं तो आपके
5:20
एक्शंस भी उसी हिसाब से शेप हो जाते हैं
5:24
और वही आपको एक्स्ट्राऑर्डिनरी बना देते
5:29
अब सवाल है अगर हमारे पास लिमिटिंग
5:34
बिलीव्स हैं तो उन्हें हम बदले कैसे?
5:40
अब इसके लिए भी टोनी रॉबिंस ने एक
5:42
स्ट्रेटजी बनाई है जो तीन स्टेप्स में
5:45
डिवाइडेड है। फर्स्ट आइडेंटिफाई
5:49
पहचानो। पहले अपने लिमिटिंग बिलीव्स को
5:54
जैसे मैं बिजनेस नहीं कर सकता या मैं
6:02
अंग्रेजी का एग्जांपल दोबारा से लेते हैं।
6:04
एक बच्चे ने सोच ही लिया कि मैं अंग्रेजी
6:08
तो वो एफर्ट ही नहीं करेगा। एंड भाषा
6:13
सीखने के लिए दिमाग से चाहिए ज्यादा चाहिए
6:18
अब बंदा नालायक है या समझदार है? बोल तो
6:24
क्योंकि लैंग्वेज के लिए चाहिए रेपटीशन।
6:27
प्रैक्टिस। अब एलिमिटिंग बिलीव बना लिया
6:30
कि मेरे को तो अंग्रेजी आ ही नहीं सकती।
6:31
तो वो प्रैक्टिस और रेपटीशन वाला काम तो
6:34
खत्म ही हो गया। तो जिंदगी में कभी आएगी
6:36
नहीं। अब प्रॉब्लम अंग्रेजी में है या उस
6:39
बंदे के बिलीफ में है। सो पहला स्टेप है
6:46
अब एक बार आपने आइडेंटिफाई कर लिया तो फिर
6:50
उन्हें चैलेंज करो। सवाल पूछो। क्या यह
6:53
100% सच है? क्या इसके अगेंस्ट कोई
7:02
अगर मैं ये बिलीफ बना लूं कि मैं गांव को
7:04
मैं अंग्रेजी बोल नहीं सकता तो क्या ये
7:07
100% सच है? नहीं है। क्या इसके अगेंस्ट
7:10
कोई एग्जांपल है? बहुत एग्जांपल्स हैं।
7:12
भरे पड़े हैं। बिजनेस में, स्पोर्ट्स में,
7:15
एंटरटेनमेंट में। हरभजन सिंह बिल्कुल
7:18
अंग्रेजी नहीं आती थी। आज फराटेदार बोलते
7:20
हैं। कैसे बोलना स्टार्ट कर दिया? माहौल
7:23
में रहे प्रैक्टिस की।
7:30
अब आपने आइडेंटिफाई कर लिया कि लिमिटिंग
7:33
बिलीफ कौन सा है? अब आपने चैलेंज भी कर
7:35
लिया। अब उसको रिप्लेस करना है। रिप्लेस
7:37
का मतलब क्या है? अब उन बिलीव्स को एंपावर
7:41
करने वाले नए बिलीफ्स से रिप्लेस करो। मैं
7:44
अंग्रेजी नहीं बोल सकता। तो रिप्लेस करो।
7:47
मैं अगर रोज आधा घंटा प्रैक्टिस करूं तो
7:50
मैं एक या दो या तीन महीने बाद अंग्रेजी
7:55
या मैं बिजनेस नहीं कर सकता। कोई
7:57
एंपावरिंग बनाओ। मैं सीख कर बिजनेस कर
8:00
सकता हूं। या मैंने या मैं अपने ड्रीम्स
8:07
याद रखो बिलीफ एक आदत की तरह है। उसे चेंज
8:11
किया जा सकता है। अगर आप कमिटमेंट के साथ
8:19
दोस्तों नीरज चोपड़ा और हितेश अग्रवाल की
8:23
कहानी एक ही बात क्लियर करती है। बिलीव्स
8:26
में शक्ति होती है बनाने की भी और
8:30
बिगाड़ने की भी। अगर नीरज चोपड़ा ने यह
8:33
मान ही लिया होता कि इंडिया कभी एथलेटिक्स
8:36
में गोल ला ही नहीं सकता तो शायद आज हमें
8:39
ओलंपिक पोडियम पर खड़े होने का गौरव नहीं
8:42
मिलता। और अगर रितेश अग्रवाल ने यह मान
8:46
लिया होता कि छोटे शहर का लड़का कुछ नहीं
8:48
कर सकता तो o कभी दुनिया की टॉप
8:51
हॉस्पिटिटी कंपनीज बनती ही नहीं।
8:56
अपनी लाइफ में भी देखिए आपके हर छोटे
9:00
डिसीजन के पीछे एक बिलीफ होता है। अगर
9:04
बिलीफ है कि आप फेल हो जाओगे तो आप शुरुआत
9:10
से पहले ही कदम पीछे कर लोगे। रुक जाओगे।
9:15
लेकिन अगर ठान लिया आपने बिलीव बना लिया
9:17
है कि मैं सीख कर गिर कर उठकर एक दिन
9:20
सक्सेसफुल हो जाऊंगा तो आपके अंदर एक अलग
9:25
सी एनर्जी अलग सी वाइब्रेशन अलग सा बिलीफ
9:29
सेट रहेगा और जब आप एक एमावरिंग बिलीफ
9:36
वाले इंसान बनते हो तो ऐसीऐसी
9:40
अपॉर्चुनिटीज को देख सकते हो जो बाकी लोग
9:45
मिस कर देते हैं। टोनी रॉबिनस कहते हैं
9:50
बिलीव्स आर द कंपास एंड मैप्स दैट गाइड अस
10:03
कि अगर आपके बिलीव्स स्ट्रांग और
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एंपावरिंग है तो आप चाहे कहां भी हो कहां
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से भी आए हो आप अपनी मंजिल तक जरूर पहुंच
10:20
क्योंकि जो बिलीव्स हैं आपके वो आपके लिए
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एक मैप का काम करेंगे। एक कंपास का काम
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करेंगे। आपको दिशा बताएंगे। आपको रास्ता
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सो दोस्तों आज से एक कमिटमेंट करो खुद के
10:40
आपकी लाइफ में जो भी लिमिटिंग बिलीव्स हैं
10:45
उनको आइडेंटिफाई करो और उन्हें तोड़ डालो।
10:50
अपने अंदर नए वाले एंपावरिंग बिलीव्स
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डेवलप करो जो कि आपको ऊपर उठाएंगे जो आपको
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मोटिवेट करेंगे और जो आपको अपने गोल्स के
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और करीब ले जाएंगे। याद रखो आपके बिलीव्स
11:07
ही आपकी टेस्टिनी बनाते हैं और आपके
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बिलीव्स को बदलने की पावर आपके ही हाथ में
11:14
है। दूसरे लोग सिर्फ आपको मोटिवेट कर सकते
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हैं। मैं भी आपको बता सकता हूं बट बदलना
11:21
आपने खुद से है। वो कैसे? अपने लिमिटिंग
11:24
बिलीव्स को एंपावरिंग बना के। तो दोस्तों,
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यह था अवेकन द जॉइंट विद इनका चैप्टर टू
11:29
का पावरफुल समरी। और आज हमने देखा कि कैसे
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बिलीव्स चाहे पॉजिटिव हो या नेगेटिव आपकी
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जिंदगी को शेप करते हैं।
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आप अपने एग्जांपल्स देख लो। एक तरफ
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लिमिटिंग बिलीव्स ने हॉवर्ड हजीस को
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बर्बाद कर दिया और दूसरी तरफ एंपावरिंग
11:47
बिलीव्स ने गांधी जी की पूरी दुनिया का
11:52
और हमारे अपने देश के नीरज चोपड़ा और
11:54
नितीश अग्रवाल जैसे लोग यह साबित करते हैं
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कि अगर बिलीव स्ट्रांग हो तो दुनिया की
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कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती। अब
12:01
सवाल यह है आप अपनी लाइफ किस तरह से जीना
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चाहते हो? कि आप भी अभी तक उन बिलीव्स के
12:09
साथ जी रहे हो जो आपको रोक रहे हैं। जो
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आपको जकड़ के बैठे हैं।
12:15
आपको मूव ही नहीं करने देते। या फिर आज से
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एक नया डिसीजन लोगे और ऐसे बिलीव्स क्रिएट
12:21
करोगे जो आपको अपनी मंजिल तक ले जाएंगे।
12:25
दोस्तों एक छोटा सा बिलीफ आपकी पूरी कहानी
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ऐसे हजारों एग्जांपल्स हैं कि एक बिलीफ ने
12:34
पूरी जिंदगी में पैराडाइम शिफ्ट ला दिया।
12:36
मतलब बहुत बड़ा चेंज ला दिया। सोचने की
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बात यह है कि अगर आप इतने सालों से अपनी
12:41
लाइफ को लिमिटिंग बिलीव्स के साथ जी कर
12:44
यहां तक आ गए हो तो सोचो अगर यही बिलीफ
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एमावरिंग होते तो आप कितनी दूर तक जा सकते
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थे। इसीलिए टोनी रॉबिनस हमेशा कहते हैं
12:54
चेंज योर बिलीव्स और आप अपना फ्यूचर चेंज
13:00
और मैं भी यही कहना चाहूंगा अपने अंदर के
13:04
जॉइंट को जगाओ क्योंकि असली ताकत आपके
13:10
अगर आपको यह वीडियो वैल्यूुएबल लगा तो
13:12
प्लीज एक लाइक जरूर दीजिए। अपने दोस्तों
13:15
के साथ शेयर कीजिए ताकि उनकी भी लाइफ बदले
13:19
और चैनल को सब्सक्राइब कीजिए क्योंकि आगे
13:21
के चैप्टर्स और भी ज्यादा पावरफुल होने
13:24
वाले हैं। मैं आपसे एक छोटी सी रिक्वेस्ट
13:26
भी करना चाहूंगा। कमेंट सेक्शन में लिख के
13:29
बताएं कि आपको अपना कौन सा बिलीफ लगता है
13:32
जो आपको रोक रहा है और एक नया एमावरिंग
13:35
बिलीफ जो आप अभी अडॉप्ट करना चाहते हो।
13:38
मैं पर्सनली आपके कमेंट्स पढूंगा रिप्लाई
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करूंगा। चलिए मिलते हैं अगले वीडियो में।
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श्याम अवेकन द जॉइंट विद इन के नेक्स्ट
13:44
चैप्टर को एक्सप्लोर करेंगे। तब तक के लिए
13:46
याद रखिए बिलीव्स शेप योर डेस्टिनी। आप
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अपना बिलीफ बनाओ और अपनी कहानी लिखो।